ये पानी है या पॉयजन !

नई दिल्ली, दिल्ली के हर जोन में पानी में सीवेज के पानी की मिलावट का खतरा है, क्योंकि यहां दर्जनों जगहों पर वॉटर और सीवेज पाइप लाइन एक दूसरे को क्रॉस करते हुए निकलती हैं। यही वो जगहें हैं जहां लीकेज सबसे ज्यादा होती है। इनमें शाहपुर जट, देवली और खिड़की गांव, वेस्ट विनोद नगर, विश्वास नगर, महाराजा अग्रसेन पार्क के पास, सीएनजी पंप बलजीत नगर, महिपालपुर गांव, कापसहेड़ा गली नंबर 11, पांडव नगर की संगम कॉलोनी के नाम सबसे ऊपर हैं।

एमसीडी ने पानी के सैंपल की जांच और सर्वे की डिटेल रिपोर्ट जल बोर्ड को दे दी है। इतना ही नहीं, जहां भी पानी और सीवेज पाइपलाइन में मरम्मत की जरूरत है, वहां रोड कटिंग की फौरन अनुमति देने का ऐलान भी किया है। एमसीडी की स्टैंडिंग कमिटी के अध्यक्ष योगेंद्र चंदोलिया का कहना है कि हम हर स्तर पर सहयोग के लिए तैयार हैं। आमतौर पर जल बोर्ड जैसी एजेंसियों को रोड कटिंग के लिए एमसीडी से अनुमति लेने में हफ्ते भर का समय लग जाता है। हम उन्हें एक- दो दिन में ही इसकी अनुमति देने को तैयार हैं। एमसीडी की स्वास्थ्य समिति के अध्यक्ष डॉ. वी. के. मोंगा का कहना है कि तमाम इलाकों में पानी की 642 लाइनों के साथ सीवेज लाइनें जा रही हैं, इनमें 16 जगहों पर अब भी लीकेज है। जहां तक हमारे सैंपल सर्वे की बात है तो हर बार हमारे एरिया हेल्थ इंसपेक्टर जल बोर्ड के स्थानीय जेई के साथ मिलकर पानी के सैंपल लेते हैं और जांच कराते हैं। डीजेबी के इन अधिकारियों को जांच रिपोर्ट भी नियमित तौर पर सौंपी जाती है और उसकी रिसीविंग भी ली जाती है। बावजूद इसके डीजेबी का यह कहना कि उन्हें जानकारी नहीं दी जाती, यह सिर्फ पलड़ा झाड़ने वाली बात है।

उनका कहना है कि सीवर और पानी दोनों ही विभाग एक ही एजेंसी के पास हैं। बावजूद इसके दोनों में संयोजन की कमी के चलते लोगों को खामियाजा भुगतना पड़ रहा है। एमसीडी सदन के नेता सुभाष आर्य का कहना है कि गंदे पानी की समस्या दूर करने के लिए जल बोर्ड कभी भी एमसीडी के साथ सहयोग नहीं करता, यही वजह है कि हर बार सिर्फ पानी के सैंपल की जांच तक बात रह जाती है।

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